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अंतिम उच्चारण - शिवशंकर मिश्र

हजारों गद्य-कविताओं का कोलाज रचतीं बहुविमर्शी कहानियाँ...

'सतगुर हमसूँ रीझि करि', सन्दर्भ : प्रो0 रामनारायण शुक्ल

मुनुआ की वीरगति

जरइ रे नउआ तोर नउअरिया जरइ पंडिता तोर बेद!

जश्न : शिव शंकर मिश्र