📖 'काश होती कमीज पर कविता' शिव शंकर मिश्र का कहानी संग्रह 🌟 पुस्तक परिचय 'काश होती कमीज पर कविता'' सुप्रसिद्ध सा...
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नवीनतम रचनाएँ
हजारों गद्य-कविताओं का कोलाज रचतीं बहुविमर्शी कहानियाँ...
SHIV SHANKAR MISHRA
शिवशंकर मिश्र का 'अन्तिम उच्चारण' - रामप्रकाश कुशवाहा पुस्तक - अंतिम उच्चारण (कहानी संग्रह), कहानीकार - शिवशंकर मिश्र प्रकाशक - स...
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'सतगुर हमसूँ रीझि करि', सन्दर्भ : प्रो0 रामनारायण शुक्ल
SHIV SHANKAR MISHRA
'सतगुर हमसूँ रीझि करि', सन्दर्भ : प्रो0 रामनारायण शुक्ल वह 30 जुलाई, 1983 का दिन था, जब मैं पी.एच0डी0 में प्रवेश के लिए बी0एच0यू0 गय...
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मुनुआ की वीरगति
SHIV SHANKAR MISHRA
सुबह-सुबह गाँव में बमचख मच गया। मुनुआ चलते ट्रक से कूद पड़ा और नचकऊ पाँडे़ दरवाजे-दरवाजे थाली पीटकर फरियाद कर रहे हैं। ‘अररऽरऽ।‘ जिसने जहाँ स...
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जरइ रे नउआ तोर नउअरिया जरइ पंडिता तोर बेद!
SHIV SHANKAR MISHRA
ज्या दातर पारम्परिक नारी गीतों में जीवन के जो चित्र मिलते हैं, वे काफी पुराने लगते हैं। खास तौर पर हमारा आधुनिक जीवन...
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जश्न : शिव शंकर मिश्र
SHIV SHANKAR MISHRA
सुबह के आठ बजते-बजते रोज की तरह खाकी कमीज और चौड़ी मुहरी का उटँग पाजामा पहनकर अनंतराम दफ्तर के लिए रवाना हो गये- साइकिल से। एक बीड़ा पान वे घर...
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