संदेश

मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

‘कथादेश’ मासिक फरवरी 2020 अंक, में प्रकाशित कहानी ‘जश्न’ की समीक्षा - डॉ. निशाकान्त द्विवेदी,

 ‘कथादेश’ मासिक फरवरी 2020 अंक, में प्रकाशित  शिवशंकर मिश्र की कहानी ‘जश्न’ भारत की बहुसंख्य आबादी का प्रतिनिधित्व  करती है। इसमें जहाँ एक ओर मानव में मानव सुलभ आनंद प्राप्ति की लालसा  है, तो दूसरी ओर उचित शिक्षा/ज्ञान के अभाव में दिन-रात दुःखों को सहन  करते हुए उसे सहज सहचर स्वीकार कर लेने की प्रवृत्ति दिखाई पड़ती है।    इसमें एक ओर यदि ग्रामीण परिवेश में पलकर अनपढ़ होते हुए भी परिवार के  सदस्यों का आपसी सद्भाव और प्रेम दिखाई देता है तो दूसरी ओर शहरी परिवेश के पढ़े  लिखे लोगों की उस प्रवृत्ति को दिखाता है, जो चतुर्थ श्रेणी  कर्मचारी से हाथ मिलाने में अपनी ज्ञान-गरिमा की उच्चता प्रभावित होने का  खतरा महसूस करता है। एक ओर अभाव ग्रस्त लोग उत्सव और आनंद हेतु अवसर  निकालकर अपनी दबी इच्छापूर्ति का संतोष करते हैं और दूसरी तरफ साधन  संपन्न तनाव में जीने के अभ्यासी हो रहे हैं। कहानी धर्म, जाति के आवरण  में जीने वालों के दिखावे को भी सहज भाव से अनावृत करती है।        प्रस्तुत  कहानी गंदगी और अज्ञान के साह...