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मुनुआ की वीरगति

सुबह-सुबह गाँव में बमचख मच गया। मुनुआ चलते ट्रक से कूद पड़ा और नचकऊ पाँडे़ दरवाजे-दरवाजे थाली पीटकर फरियाद कर रहे हैं। ‘अररऽरऽ।‘ जिसने जहाँ सुनी यह खबर, वह वहीं ठिठक कर खड़ा हो गया। अभी सूरज निकला भी नहीं था। लोग गोरुआरी-बछेरुआरी में लगे थे या लोटा लेकर शौच-मैदान के लिए निकल रहे थे। सब चौंक गये। ‘मरा कि बचा मुनुआ?‘ ‘मरा होता, तो नचकऊ किरिया-करम करते कि टाठी पीटकर गौंतरी लगाते?' ‘तो काहे की फरियाद कर रहे हैं नचकऊ?' ‘नचकऊ का कहना है कि गाँव के लड़कों ने धक्का देकर उनके लड़के को चलतिया टरक से गिरा दिया।’ - जगह-जगह बातें कर रहे थे लोग। ‘पर-पंचाइत का जमाना अब कहाँ रहा पाँड़े? आज-कल के लड़के कहो मानें कहो न मानें पंचों की बात। लेकिन ठीक है। तुम पंचाइत बैठा रहे हो, तो आ रहा  हूँ मैं भी।‘ - गाय दुहकर लेरुआ ढीलते हुए बोले कामता पाठक। छोटे बच्चे नचकऊ के पीछे-पीछे चल रहे थे। उनके लिए अपूर्व दृश्य था यह। उनमें से कई अभी सोकर उठे थे। आँखें मलते बच्चे सम्मोहित हुए चले जा रहे थे नचकऊ के पीछे-पीछे। सोनबरसा गाँव के लड़कों का वह झुंड रामलीला देखने जा रहा था, शंकरगढ़ की रामलीला। होने को तो सोनबरसा में भी...

जश्न : शिव शंकर मिश्र

सुबह के आठ बजते-बजते रोज की तरह खाकी कमीज और चौड़ी मुहरी का उटँग पाजामा पहनकर अनंतराम दफ्तर के लिए रवाना हो गये- साइकिल से। एक बीड़ा पान वे घर से खाकर चले और दूसरा बीड़ा गमछे के छोर में बाँध लिया। अनंतराम का घर गाँव में था और दफ्तर शहर में। गाँव से शहर की दूरी चौबीस किलोमीटर थी। अनंतराम एक बीड़ा पान मुँह में दबाकर यह दूरी साइकिल से डेढ़-दो घंटों में पूरी कर लेते थे। लौटते समय फिर यही सिलसिला। अब की बार गमछे के छोर में बँधा पान का बीड़ा काम आता। यों अनंतराम की नौकरी में कोई ऐसी बाध्यता नहीं थी कि खाकी कमीज पहनी जाय, फिर भी वे हमेशा खाकी कमीज और चौड़ी मुहरी का सफेद पाजामा पहनते थे। दरअसल खाकी कमीज पहनने की वजह यह थी कि अनंतराम थे तो चतुर्थ श्रेणी सरकारी कर्मचारी, पर उनका कोई रुतबा नहीं था, ऐसा उन्हें लगता था। इस वजह से वे खाकी कमीज पहनते और खुद को पुलिस के सिपाही जैसा रुतबेदार महसूस करते थे। दिन के तीन बजे तक सब कुछ सामान्य ढंग से होता रहा-रोज की तरह। तकरीबन साढ़े तीन बजे, जबकि सभी अधिकारी और कर्मचारी काफी व्यस्त हो गये थे, गेट के बाहर फूटते पटाखों, लाउडस्पीकर पर बजते हनुमान-चालीसा और बीच-बीच मे...