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"बादल को घिरते देखा है' (नागार्जुन) और "मेघदूतम् (कालिदास)

अवधी कवि पं. रामगुलाम त्रिपाठी

पाठ और पुनः पाठ- शिवशंकर मिश्र का 'अन्तिम उच्चारण'-

सुधीर विद्यार्थी के '(मेरे) हिस्से का शहर'

स्नान का फल : एक पुनर्मूल्यन

हजारों गद्य-कविताओं का कोलाज रचतीं बहुविमर्शी कहानियाँ...

जरइ रे नउआ तोर नउअरिया जरइ पंडिता तोर बेद!