नवीनतम रचनाएँ

हजारों गद्य-कविताओं का कोलाज रचतीं बहुविमर्शी कहानियाँ...

  शिवशंकर मिश्र का 'अन्तिम उच्चारण' - रामप्रकाश कुशवाहा पुस्तक - अंतिम उच्चारण (कहानी संग्रह), कहानीकार - शिवशंकर मिश्र प्रकाशक - स...
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जरइ रे नउआ तोर नउअरिया जरइ पंडिता तोर बेद!

                       ज्या दातर पारम्परिक नारी गीतों में जीवन के जो चित्र मिलते हैं, वे काफी पुराने लगते हैं। खास तौर पर हमारा आधुनिक जीवन...
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‘कथादेश’ मासिक फरवरी 2020 अंक, में प्रकाशित कहानी ‘जश्न’ की समीक्षा - डॉ. निशाकान्त द्विवेदी,

 ‘कथादेश’ मासिक फरवरी 2020 अंक, में प्रकाशित  शिवशंकर मिश्र की कहानी ‘जश्न’ भारत की बहुसंख्य आबादी का प्रतिनिधित्व  करती है। इसमें जहाँ एक ओ...
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